फुलवारी में हंसने वाले गुलदानों से मिल लेना
दौलत की तामीर में अकसर उलझे उलझे रहते हो
प्यार मुहब्बत करने वाले दीवानों से मिल लेना
तनहाई की याद सताए तनहाई में जाना हो
तो फिर जंगल और पहाड़ी वीरानों से मिल लेना
आंखें पुरनम हो जायें घनघोर उदासी छा जाये
छत पे चहकती चिड़ियों की तुम मुस्कानों से मिल लेना
तेज हवा से लड़ने का जब तुमको हुनर कुछ आ जाये
तब तुम सागर की लहरों के तूफानों से मिल लेना
पीना वीना छोड़ो अब वैसे ही नशा चढ़ जायेगा
शाम ढले साकी प्याला से मैखा़नों से मिल लेना
रचना कितनी सुंदर है अनुमान अगर कुछ करना है
रचनाएं पढ़ने से पहले उनवानों से मिल लेना