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Wednesday, 6 October 2021

रफ़्ता रफ़्ता आंचों पर ये शह्र उबाला जाएगा.............

खाली कर दे पैमाना पैमाना ढाला जाएगा 
वक़्ते रूखसत जितना होगा उतना टाला जाएगा 

अपने मकां के सरमाये को अपने मकां तक रहने दो 
वरना इक दिन चौराहों पर उसको उछाला जाएगा 

दुनियाँ के अच्छे शेरों के शौक लगेंगे जब तुम को 
मीरो ग़ालिब मोमिन का दीवान खँगाला जाएगा 

कैसी उसकी माया है और कैसा उसका खेल बता 
तेरे मेरे ज़िस्म से इक दिन प्रांण निकाला जाएगा 

अपने रफ़ीकों में काफिर से अपनी जान बचा लेना 
सांप तुम्हारी खातिर उनके घर में पाला जाएगा 

मसनद पर इल्ज़ाम लगाकर और उतर कर सड़कों पर 
रफ़्ता रफ़्ता आंचों पर ये शह्र उबाला जाएगा 

                  --------राजेश कुमार राय---------