Wednesday, 29 April 2026

मख़मल है पर नींद न आए ..............

कोना कोना छान लिया है 
तुम न मिलोगे मान लिया है 

दुशमन खोज के मारा जाये 
हमने तो ये ठान लिया है 

द्वार खुले हैं समझौतों के 
बंदूकें भी तान लिया है 

घर में बैठे गद्दारों को 
हमने अब पहचान लिया है 

कितनी पी है किस मैकश़ ने 
साक़ी ने सब जान लिया है 

मख़मल है पर नींद न आए 
ये कैसा दीवान लिया है 

जब जब प्यास लगी सागर को 
बादल का अहसान लिया है 

....... राजेश कुमार राय .........







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