मिल जाएंगे यार किसी दिन
द़िल में रखना ठीक नहीं है
कर देना इज़हार किसी दिन
उसकी गली से रोज गुजरना
शायद हो दीदार किसी दिन
साक़ी का भी पूरा होगा
सपनों का संसार किसी दिन
मुझ से बिछड़कर जाने वाला
लौटेगा इक बार किसी दिन
हर लत का अंजाम बुरा है
कर देगा बीमार किसी दिन
मत भर नाव को हद से ज्यादा
डूबेगी मझधार किसी दिन
समझौता गर कर न सके तो
निकलेगी तलवार किसी दिन
द़िल से कोशिश करते रहना
होगी नैया पार किसी दिन