Saturday, 25 July 2026

लौटेगा इक बार किसी दिन......

टूटेगी दीवार किसी दिन 
मिल जाएंगे यार किसी दिन 

द़िल में रखना ठीक नहीं है 
कर देना इज़हार किसी दिन 

उसकी गली से रोज गुजरना 
शायद हो दीदार किसी दिन 

साक़ी का भी पूरा होगा 
सपनों का संसार किसी दिन 

मुझ से बिछड़कर जाने वाला 
लौटेगा इक बार किसी दिन 

हर लत का अंजाम बुरा है 
कर देगा बीमार किसी दिन 

मत भर नाव को हद से ज्यादा 
डूबेगी मझधार किसी दिन 

समझौता गर कर न सके तो 
निकलेगी तलवार किसी दिन 

द़िल से कोशिश करते रहना 
होगी नैया पार किसी दिन 

....... राजेश कुमार राय..........

14 comments:

  1. बहुत ही प्यारी दिलकश गज़ल राजेश जी! अरसे बाद आपके ब्लॉग पर आकर बहुत ख़ुश हूँ! बहुत सुंदर रचना के लिए हार्दिक आभार और शुभकामनायें 🙏

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    1. आप का हार्दिक आभार आदरणीया

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  2. लाज़वाब गज़ल है सर।एक से बढ़कर एक शेर वाह।
    सादर।
    --------
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना मंगलवार २८ जुलाई २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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    1. आप का हार्दिक आभार आदरणीया

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय

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  4. बेहतरीन शायरी

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    1. आप का हार्दिक आभार आदरणीया

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  5. Replies
    1. बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीया

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    1. आप का हार्दिक आभार

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  7. मुझ से बिछड़कर जाने वाला
    लौटेगा इक बार किसी दिन
    हर लत का अंजाम बुरा है
    कर देगा बीमार किसी दिन

    वाह वाह वाह 🙏 बहुत ही सुंदर रचना, सादर प्रणाम आपको और आपकी लेखनी को 🙏

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  8. आप का हार्दिक आभार आदरणीय

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