जब साथ हमारा छूटेगा
तब तेरा भरम भी टूटेगा
रहबर रहबर करते रहना
रहबर तुमको भी लूटेगा
जो औरों में आग लगा दे
वो अपना घर भी फूंकेगा
गैर वतन में बसने वाले
कौन वहां तुमको पूछेगा
न्याय नहीं मिलने वाला है
इसका गुस्सा कब फूटेगा
आंख से तेरे पीना साक़ी
जीते जी कैसे भूलेगा
मौसम ने संकेत दिया है
आज समंदर फिर रूठेगा
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